नरेन्द्र मोदी सरकार के बनने के बाद से जय शाह की कंपनी की शुद्ध संपत्ति में 24.61 करोड़ रुपए की बढ़ोतरी हुई है.

कारपोरेट मामलों के मंत्रालय की वेबसाइट पर लंबे समय बाद अपलोड की गई जानकारी के मुताबिक, गृह मंत्री अमित शाह के बेटे जय शाह का कारोबार फल-फूल रहा है. कारवां ने कुसुम फिनसर्व एलएलपी द्वारा दायर कारोबार से संबंधित दस्तावेजों की पड़ताल की. जय शाह कुसुम फिनसर्व एलएलपी (सीमित देयता भागीदारी) के मनोनीत साझेदार हैं. यह पद कंपनी के निदेशक के बराबर होता है. वित्त वर्ष 2015 और 2019 के बीच, जब से नरेन्द्र मोदी की अगुवाई वाली भारतीय जनता पार्टी की सरकार सत्ता में आई है, जय शाह की कुसुम फिनसर्व की शुद्ध संपत्ति में 24.61 करोड़ रुपए की बढ़ोतरी हुई है. इस कंपनी की शुद्ध अचल संपत्ति में 22.73 करोड़ रुपए का इजाफा हुआ, चल संपत्ति में 33.05 करोड़ रुपए की बढ़ोतरी हुई और इसकी कुल आय में 116.37 करोड़ रुपए का इजाफा हुआ. जय शाह के सितारे बुलंदी पर हैं. अक्टूबर में वह भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के सचिव बन गए.

कारवां ने अगस्त 2018 में प्र​काशित एक रिपोर्ट में बताया था कि जय की कुसुम फिनसर्व ने बीते सालों की खराब माली हालत के बावजूद, 2016 के बाद से क्रेडिट सुविधाओं में नाटकीय वृद्धि हासिल की है. 2016 में अमित शाह ने बेटे की इस कंपनी के लिए 25 करोड़ रुपए की क्रेडिट सुविधा प्राप्त करने के लिए अपनी दो संपत्तियां गिरवी रखी थीं.

सभी एलएलपी कंपनियों को हर साल 30 अक्टूबर तक अपने खातों का विवरण दर्ज करना होता है. ऐसा न करना सीमित देयता भागीदारी अधिनियम-एलएलपी के तहत अपराध है और उल्लंघनकर्ता पर पांच लाख रुपए तक का जुर्माना लग सकता है. इस साल जनवरी में कारवां ने रिपोर्ट प्रकाशित कर खुलासा किया था कि वित्त वर्ष 2017 और 2018 के लिए कुसुम फिनसर्व ने अपना विवरण दर्ज नहीं कराया है. बीजेपी सरकार और कारपोरेट मामलों के मंत्रालय द्वारा वित्तीय विवरण जमा न करने वाली कंपनियों पर कार्रवाई किए जाने के बावजूद कुसुम फिनसर्व ने लगातार दो वर्षों तक समय पर अपना विवरण दर्ज नहीं कराया.

कुसुम फिनसर्व जो 2013 में एक कंपनी के रूप में निगमित थी, बाद में एलएलपी में बदल गई. इस कंपनी के कुछ साल लाभ वाले रहे. कारपोरेट मामलों के मंत्रालय में जमा दस्तावेजों के अनुसार, कुसुम फिनसर्व को वित्त वर्ष 2014 में 23729 रुपए का नुकसान हुआ था. इसने अगले साल तेजी से सुधार किया और कर अदायगी के बाद इसका लाभ 1.2 करोड़ रुपए था. 2016 में इसे 34934 रुपए का नुकसान हुआ लेकिन तब से यह बहुत फल-फूल रही है. वित्त वर्ष 2017 में इसका लाभ 2.19 करोड़ रुपए था और 2018 में 5.39 करोड़ रुपए. ताजा वित्त वर्ष में इसने 1.81 करोड़ रुपए का लाभ कमाया. मुनाफे में आई हालिया गिरावट को शायद इसके परिचालन में बढ़े खर्चे से समझा जा सकता है. कंपनी की बैलेंसशीट के अनुसार, वित्त वर्ष 2019 में इसके परिचालन खर्च, निजी और प्रशासनिक खर्चे, कच्चे माल, बिजली, ईंधन और बीमा पर खर्च में वृद्धि हुई है. यह बताता है कि कंपनी का कारोबार बढ़ रहा है.